Tuesday, March 24, 2009


हमर प्रेम

हमर ठोरक पपड़ी पर जे एकटा मर्म सुखा रहल अछि
हमर जिह्वा पर जे धूरा उड़ि रहल अछि
हमर सोनितक धार सँ जे धधरा उठि रहल अछि
हमर देहक शंख सँ जे समुद्रक आवाज आबि रहल अछि
हमर आत्माक अंतरिक्ष मे जे चिड़ै-चुनमुनी कलरव क’ रहल अछि
हमर स्मृतिक गाछ पर जे झिमिर-झिमिर बरखा भ’ रहल अछि
तकरा सभक चोट आ खोंच केँ
टीस आ मोंच केँ
रूप आ रंग केँ
स्वर आ गंध केँ
कोना पानक एकटा बीड़ा बनाक’
हम अहाँक आगू राखि दी आ कही-
लिअ’ ग्रहण करू
ई थिक अहाँक प्रति हमर प्रेम…

जखन कि हमरा बूझलए
जे हमर प्रेम
गुड़ियाम मे बान्हल एक टा पियासल बरद अछि
जे खाली बाल्टी केँ देखि-देखिक’ भरि राति हुकरैत अछि

हमर प्रेम अछि
छिट्टा सँ झाँपल एक टा छागर
जे बन्द दुनिया सँ बहरयबाक बेर-बेर चेष्टा करैत अछि

हमर प्रेम धूरा-गर्दा मे जनमल एक टा टुग्गर चिलका अछि
जे दीने-देखार हेरा गेल अछि
बीच बाजार मे

तखन अहीं कहू
कोना हम अपन आत्माक फोका केँ
एक टा मृदुल भंगिमाक संग अहाँक सम्मुख तस्तरी मे राखि दी
आ कही-
लिअ’ ग्रहण करू…

हमर प्रेम जँ किछु अछि तँ एक टा फूजल केबाड़
हमर प्रेम जँ किछु अछि तँ एक टा कातर पुकार
कि आउ
अइ दुनियाक सभ सँ कोमल आ सभ सँ धरगर चीज बनिक’
आबि जाउ

अहाँक स्वागत मे
हमरा ठोर सँ ल’क’ अहाँक ओसार धरि जे ओछाओल अछि
ओ कोनो कालीन नहि
अहाँक तरबा लेल व्यग्र
खून सँ छलछ्ल करैत हमर ह्रदय अछि

आ हमर हड्डीक प्राचीन अंधकार मे
ओसक एक टा बुन्न सन कोमल
अनेक युग सँ अहाँक बाट ताकि रहल अछि हमर प्राण…

हमर प्राण अछि अहाँक आघात लेल आतुर
अहाँक आघात एहि जीवनक एक मात्र त्राण

10 comments:

  1. अनेक युग सँ अहाँक बाट ताकि रहल अछि हमर प्राण…

    हमर प्राण अछि अहाँक आघात लेल आतुर
    अहाँक आघात एहि जीवनक एक मात्र त्राण

    नीक प्रस्तुति अछि। सम्पूर्ण कविता प्रेममय। वाह। एहि भाव सँ प्रेरित तात्कालिक तुकबंदी प्रेषित अछि-

    खर्च केला सँ घटत नञि कहियो रोज बढ़त श्रीमान।
    दुनियाँ के अनमोल तत्व दुइ प्रेमक सँगहि ज्ञान।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
    कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

    ReplyDelete
  2. भाइ,आभार!अहाँक ब्लॉग देखलहुँ।मैथिली मे किएक नहि?

    ReplyDelete
  3. प्रतीक्षा करू, मैथिलियो मे ब्लाग बनेबाक प्रयास रहत।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
    कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

    ReplyDelete
  4. मन गदगद भऽ गेल
    कविता पढ़ि कऽ
    काश हमहु एतबे नीक लिख सकितहुं
    सॊचि सकितहुं

    ReplyDelete
  5. vahut nik kavita lagal paidh ka
    prakash kumar thakur
    site - http://maithilisongsgeet.blogspot.com/

    ReplyDelete
  6. nice information, for maithili films do visit this site. maithili films

    ReplyDelete
  7. For free download of Maithili Films, Maithili Movies

    ReplyDelete
  8. for latest Maithili movies do visit this site. MAITHILI MOVIES

    ReplyDelete
  9. nice information, for Maithili movies do visit this site. MAITHILI MOVIES

    ReplyDelete